Wednesday, July 29, 2009

कस्तूरी सुबह



सिंदूरी- सिंदूरी लालिमायुक्त
एक तरोताज़ा सुबह.

लगा जैसे की कोई तन्वि है,

पलाश के अबीर में लिपटी हुई,


सुवासित हँवाओ से घिरी हुई,

भीगी हुई बयारों में भीगी हुई.

और ठण्ड से थरथराती हुई,

लगा जैसे अभी नदी तट से लौटी है .


नरम-नरम हाँथों से छूकर,

गीले-गीले बाल संवार कर

अपना उत्कलित सौंदर्य दिखाकर,

और सबका आलस भगाकर .

वह 'कस्तूरी सुबह'

अपने आप को पूर्ण कर रही है

चढ़ते पहर के आगो़श में जा कर.